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वस्तु-स्थायित्व (Object Permanence) क्या है?

वस्तु-स्थायित्व यह समझ है कि कोई चीज़ आँखों से ओझल होने पर भी मौजूद रहती है। पियाजे के अनुसार यह संवेदी-गामक अवस्था की सबसे बड़ी उपलब्धि है, जो लगभग आठ से बारह महीने में शुरू होकर दो वर्ष तक पक्की हो जाती है।

वस्तु-स्थायित्व: विस्तृत व्याख्या

वस्तु-स्थायित्व को समझें

बहुत छोटे शिशु के लिए जो दिखता नहीं, वह है ही नहीं। इसलिए खिलौना कपड़े के नीचे छिपा दें तो वह उसे ढूँढता नहीं। धीरे-धीरे वह छिपी चीज़ ढूँढने लगता है, जो बताता है कि उसके मन में चीज़ की छवि बन चुकी है। यही आगे चलकर प्रतीकात्मक सोच की नींव बनती है।

याद रखने योग्य बिंदु

  • संवेदी-गामक अवस्था (जन्म से लगभग दो वर्ष) की प्रमुख उपलब्धि
  • लुका-छिपी का खेल इसी समझ से मज़ेदार बनता है
  • पूर्ण होने पर शिशु छिपी वस्तु को क्रमबद्ध ढंग से ढूँढने लगता है

उदाहरण

शिशु के सामने खिलौना तौलिये के नीचे छिपाने पर छह माह का शिशु उसे भूल जाता है, जबकि पंद्रह माह का शिशु तौलिया हटाकर खिलौना ढूँढ लेता है, क्योंकि उसे पता है कि वह वहीं है।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

जो दिखे नहीं वह भी मौजूद है, यह समझ वस्तु-स्थायित्व है, और इसका संबंध संवेदी-गामक अवस्था से जोड़ा जाता है। संरक्षण को इससे न मिलाएँ, वह मूर्त संक्रियात्मक अवस्था की बात है।

वस्तु-स्थायित्व पर अभ्यास प्रश्न (MCQ)

पियाजे के सभी प्रश्न देखें →

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संदर्भ
  • जीन पियाजे, The Construction of Reality in the Child (अंग्रेज़ी अनुवाद 1954)
  • NCERT, मनोविज्ञान की पाठ्यपुस्तकें