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स्कीमा (Schema) क्या है?

स्कीमा सोचने, समझने और व्यवहार करने का एक संगठित ढाँचा है, जिसे बालक अनुभवों से बनाता है। पियाजे के अनुसार नई जानकारी या तो इसी ढाँचे में जुड़ जाती है (आत्मसातीकरण) या ढाँचा खुद बदल जाता है (समायोजन)।

स्कीमा: विस्तृत व्याख्या

स्कीमा को समझें

शिशु के पास शुरू में चूसने, पकड़ने और देखने जैसे सरल स्कीमा होते हैं। अनुभव बढ़ने के साथ ये आपस में जुड़कर जटिल मानसिक ढाँचे बन जाते हैं, जैसे कुत्ते, गिनती या न्याय की समझ। विकास का मतलब ही है स्कीमा का बदलना और ज़्यादा व्यवस्थित होना।

याद रखने योग्य बिंदु

  • स्कीमा व्यवहारात्मक भी होते हैं (पकड़ना) और मानसिक भी (श्रेणी बनाना)
  • आत्मसातीकरण और समायोजन स्कीमा को बनाने-बदलने की दो प्रक्रियाएँ हैं
  • दोनों के बीच संतुलन बनाना संतुलनीकरण कहलाता है

उदाहरण

बच्चा चार पैरों वाले जानवर का स्कीमा बनाकर कुत्ते को पहचानता है। गाय देखने पर पहले यही स्कीमा लगाता है, ग़लती पर टोका जाता है, तो गाय के लिए अलग स्कीमा बना लेता है।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

सोचने का संगठित ढाँचा या मानसिक संरचना जैसे शब्द आएँ तो उत्तर स्कीमा है। इसके साथ आत्मसातीकरण, समायोजन और संतुलनीकरण को जोड़कर याद रखें।

स्कीमा पर अभ्यास प्रश्न (MCQ)

पियाजे के सभी प्रश्न देखें →

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संबंधित अवधारणाएँ

संदर्भ
  • जीन पियाजे, The Origins of Intelligence in Children (अंग्रेज़ी अनुवाद 1952)
  • NCERT, मनोविज्ञान की पाठ्यपुस्तकें