अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'आत्म-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy)—जिसे उस व्यक्तिपरक विश्वास या संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत कोई शिक्षार्थी किसी विशिष्ट कार्य या चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा करने की अपनी स्वयं की क्षमताओं का आकलन करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लक्ष्य-निर्धारण, दृढ़ता, शैक्षणिक प्रेरणा और संज्ञानात्मक स्वायत्तता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
अल्बर्ट बंडूरा के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (या सामाजिक संज्ञानात्मक सिद्धांत) के अनुसार, 'आत्म-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) किसी व्यक्ति का अपनी उन क्षमताओं पर विश्वास है जिसके द्वारा वह किसी विशिष्ट परिस्थिति या कार्य को पूरा करने के लिए आवश्यक क्रियाओं को व्यवस्थित और निष्पादित कर सकता है। विकल्प (c) पूर्ण रूप से सत्य है क्योंकि उच्च आत्म-प्रभावकारिता वाले शिक्षार्थी चुनौतियों से डरते नहीं हैं, बल्कि उन्हें सीखने के अवसर के रूप में देखते हैं। वे कठिनाइयों के समय हार नहीं मानते, बल्कि अधिक दृढ़ता और रणनीतिक सोच के साथ कार्य करते हैं। यह अवधारणा विद्यार्थियों में आंतरिक प्रेरणा, स्व-नियमन (Self-regulation) और संज्ञानात्मक विकास को बढ़ावा देती है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- बंडूरा ने अपने सिद्धांत में प्रेक्षणात्मक अधिगम (Observational Learning) और पारस्परिक determinism पर बल दिया है।
- विकल्प (a) गलत है क्योंकि उच्च आत्म-प्रभावकारिता वाले बच्चे असफलताओं को सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा मानते हैं, जन्मजात अयोग्यता का प्रमाण नहीं।
- विकल्प (b) भ्रामक है क्योंकि निम्न आत्म-प्रभावकारिता वाले शिक्षार्थी अक्सर जटिल समस्याओं से बचते हैं और उनमें आत्मविश्वास की कमी होती है।
- विकल्प (d) गलत है क्योंकि आत्म-प्रभावकारिता केवल बाह्य पुरस्कारों पर आधारित न होकर आंतरिक संज्ञानात्मक विश्वास से जुड़ी होती है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास और शिक्षाशास्त्र में अल्बर्ट बंडूरा का योगदान मील का पत्थर है। आत्म-प्रभावकारिता शिक्षार्थियों के शैक्षणिक निष्पादन को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। अधिक जानने के लिए पढ़ें अल्बर्ट बंडूरा का सामाजिक अधिगम सिद्धांत।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक के रूप में कक्षा-कक्ष में विद्यार्थियों की आत्म-प्रभावकारिता को बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। जब शिक्षक बच्चों को रचनात्मक प्रतिक्रिया (Constructive Feedback), छोटे और प्राप्त करने योग्य लक्ष्य, तथा सहयोगात्मक अधिगम का अवसर प्रदान करते हैं, तो विद्यार्थियों में उच्च आत्म-प्रभावकारिता विकसित होती है। परीक्षा में बंडूरा के चरणों (ध्यान, धारणा, पुनरुत्पादन, और अभिप्रेरण) तथा आत्म-विनियमन से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। अत: इस संप्रत्यय की गहरी समझ होना आवश्यक है।